आन्तरिक_Motivation

जिंदगी मिली है तो जी भर के जियो…..

Motivation meaning in Hindi | Self-motivated कैसे रहे |

Motivation meaning in Hindi | Self-motivated कैसे रहे |

हम जिस समाज में रह रहे है, उसमे motivation एक प्रचलित शब्द है। जो हर college, School, Company etc. जगह सुनने को मिलता है। आज कल लोगो को किसी भी काम को करने के लिए बाहरी प्रेरणा की जरूरत पड़ती है। किसी भी व्यक्ति के अंदर आंतरिक प्रेरणा (Self-motivation) क्यों नही है। क्या आपने कभी सोचा ऐसा क्यों है ?क्या आप motivation का मतलब समझते है?कही इसका कारण , यह तो नहीं की भीड़ भाड़ वाली इस दुनिया में हमने खुद को समय देना ही बंद कर दिया है। आइए (motivation meaning in hindi) इन सब बातो को समझने की कोशिश करते है–

Motivation क्या है?

प्रेरणा (motivaion) ,यह आत्म-साक्षात्कार की एक कला है। जिसके माध्यम से हम खुद को और अच्छे तरीके से समझ पाते है। आसान भाषा में कहे तो motivation वह साधन है, जिसके माध्यम से हमारे अंदर उस Positive energy का उदभव होता है। जो हमे हमारे काम को करने के लिए बहुत आवश्यक है।

अगर आप यह सोच रहे की हमे यह positive energy बाहर से मिलती है, तो आप गलत है। यह हमारे अंदर ही है बस motivation वह माध्यम जिससे यह बाहर आती है। Motivation का माध्यम भी दो तरह का है।

हमे प्रेरित होने की आवश्यकता क्यों पड़ती है?

प्रेरणा हमारे जीवन की प्रेरक शक्ति होती है। इसका जन्म सफल होने की इच्छा से होता है। सफलता के बिना जिंदगी में ना तो इज्जत मिलती है ना ही घर या दफ्तर में आनंद और उत्तेजना का माहौल बन पाता है। जिंदगी उस टेढ़े मेढ़े पहिए की तरह हो जाती है, जिस पर हचकोले खाते हुए सवारी करनी पड़ती है।(motivation meaning in hindi)

Motivate होने के प्रकार –

  1. बाह्य प्रेरणा (External Motivation)
  2. आंतरिक प्रेरणा (Self-motivation)

आइए (motivation meaning in hindi) इन्हे हम विस्तार से समझते है, की यह क्या होते है–

1.बाह्य प्रेरणा (External Motivation)

Motivation के इस प्रकार में हम किसी बाहरी माध्यम के द्वारा प्रेरित किए जाते है। वह कुछ भी हो सकता है जैसे- Motivational quotes, motivational speaker, motivational video, व्यक्ति, वस्तू या आपके माता पिता कोई भी हो सकता है। ऐसे प्रेरणा का असर अधिक समय तक नही रहता जो किसी और माध्यम से मिला हो।

इसका उपयोग ज्यादातर industries में, network marketing में,या किसी कार्य को तुरंत करने के लिए किया जाता है। यह दीर्घकालिक नही होता, इसका मुख्य कारण यह की, इसमें जिन विचारो से आपको ऊर्जा मिलती है। वह आपके नही किसी और के होते है या फिर उसका source कुछ और होता है।

इसलिए उस source के हटते ही आपकी ऊर्जा भी कम होने लगती है। इसका यह मतलब बिल्कुल नही की external motivaion व्यर्थ है। हर चीज अपनी जगह सही है अगर उसका सही उपयोग किया जाए। मुख्यता external motivaion का मुख्य उद्देश्य हमारी आत्म मंथन को बढ़ाना ही है। आइए इसे एक उदाहरण के माध्यम से समझते है–

मान लीजिए की किसी देश से युद्ध होने वाला है। उस समय हमारे अंदर युद्ध में लड़ने के लिए कुछ प्रेरणा भरे वाक्य कहे जायेंगे। जो कहने को तो external होगा,लेकिन वह जरूरी है।

2.आंतरिक प्रेरणा (Self-motivation)

इसमें हमे किसी बाहरी माध्यम की जरूरत नहीं होती। इसका मुख्य source हम खुद ही होते है।इसमें हम आत्म-मंथन से ऊर्जा प्राप्त करते है। यह दीर्घकाल तक असरदार रहता है। यूं कहे की motivation का वास्तविक मतलब Self-motivation से ही है। जब हम self motivate होते है।

तब हमारे विचारो का विस्तार होता, हमारे सोच में गहराई आती है। ऐसे व्यक्ति जिनके motivation का मुख्य स्रोत आंतरिक होता है। उनको जीवन में आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। ऐसे व्यक्ती ही भविष्य में leader बनते है, और इस समाज को देश को आगे बढ़ाते है और दूसरों के प्रेरणा का स्रोत भी बनते है।

इसका मूल आधार है आत्मविश्वास। अगर व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर है तो वह कभी खुद को प्रेरित नही कर सकता। हम अपना आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए इस वाक्य को दिन में कई बार दोहरा सकते हैं ,“मेरा आत्मविश्वास हर रोज बढ़ता जा रहा है।”

आत्म सम्मान ,उपलब्धि के एहसास, जिम्मेदारी और विश्वास जैसी आंतरिक प्रेरणाए व्यक्ति के अंदर से आते हैं। आंतरिक प्रेरणा व्यक्ति को अनुभव होने वाली आंतरिक संतुष्टि हैं , इसका जवाब संबंध जीत या सफलता से नहीं होता। बल्कि यह तो किसी काम को पूरा करने से महसूस होने वाली पूर्णता से जन्म लेती है। सबसे अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक प्रेरणाए हैं– मान्यता और जिम्मेदारी।

Motivation to Demotivation – प्रेरित से प्रेरणाहीन तक

व्यक्ती के प्रेरित से प्रेरणाहीन होने के चार पडाव है।

1. प्रेरित लेकिन बेअसर

आइए इसे हम एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। जब व्यक्ति एक नौकरी के लिए किसी कंपनी में नियुक्त होता है, तो उसके अंदर बहुत मोटिवेशन होता है। लेकिन उसे वहां पर काम करने का अनुभव न होने की वजह से वहां के माहौल के बारे में पता न होने की वजह से वह अच्छे से काम नहीं कर सकता इसको कहते हैं Motivated but ineffective.

2. प्रेरित और असरदार.

इस पड़ाव पर पहुंचते-पहुंचते कर्मचारी है सीख चुका होता है ,कि उसे क्या करना है और वह कामों को जोशो खरोश के साथ करता है। वह अपने पैसे को समझ चुका होता है और यह बात उसकी काम करने की शक्ति में दिखाई देती है।

3. प्रेरणाहीन पर असरदार.

कुछ समय के बाद कर्मचारी की प्रेरणा में कमी आने लगती है। वह आपने पेशे की टिकड़मे सीखने लगता है। इस पड़ाव पर पहुंचकर कर्मचारी प्रेरणा हीन हो चुका होता है। वह इतना काम तो करता रहता है, जिससे उसके मालिक को उसे नौकरी से निकालने का मौका ना मिले, लेकिन वह प्रेरित होकर काम नहीं करता।

4. प्रेरणाहीन – बेअसर

अगर कोई कर्मचारी पडाव पर पहुंच जाता है, तो फिर मालिक के पास उसे नौकरी से निकालने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचता है। इस बिंदु पर सबसे उचित कदम यही होता है। ऐसा व्यक्ति ना तो खुद के लिए कोई काम कर पाता है, और ना ही किसी कंपनी या संस्था के लिए अच्छा होता है।

प्रेरणहीन होने के कारक – Demotivating factor

  • अनुचित आलोचना
  • सबके सामने अपमानित किया जाना
  • दिशा हीनत
  • असफलता का डर
  • सफलता से मिली संतुष्टि
  • कोई निश्चित लक्ष्य ना हो
  • आत्म सम्मान की कमी
  • नकारात्मक आत्मावार्ता
  • प्राथमिकताएं तय ना करना
  • घटिया मानदंड , इत्यादि।

आत्मप्रेरण के तरीके – Methods of Self-motivation

  1. खुद को मान्यता दें।
  2. अपनी इज्जत करें।
  3. अच्छे श्रोता बने।
  4. एक लक्ष्य निर्धारित करें।
  5. दूसरों की मदद करें।
  6. खुद के सामने एक चुनौती पेश करें।
  7. अपने बारे में पॉजिटिव बोले और सोचे।
  8. प्रतिदिन रात को सोने से पहले, और सुबह उठने के बाद, अपने बारे में, अपने उद्देश्य के बारे, में विश्वास के साथ कुछ अच्छा बोले।

Conclusion – निष्कर्ष

लोग कोई काम हमारी पैदा की हुई वजह से नहीं बल्कि खुद की वजहों से करते हैं। आइए इसे उदाहरण के माध्यम से समझते हैं। एक बार की घटना है एक व्यक्ति और उसका बेटा एक बछड़े को बखार में घुसाने की कोशिश कर रहा था।

बछड़े को खींच खींचकर और धक्का दे देकर बाप बेटे बुरी तरह थक गए और बछड़ा बुखार में नहीं घुसा। तभी एक छोटी सी लड़की उधर से गुजरी उसने अपनी नन्ही सी उंगली बछड़े के मुंह में डाल दी उसके बाद तो बछड़ा उंगली को चूसते उस लड़की के पीछे पीछे बखार में बड़े आराम से चला गया। अब तो आपको motivation meaning in hindi समझ आ गया होगा |

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